बिग बॉस सीजन 19
बिग बॉस सीजन 19 की शुरुआत हो गई है और यह शो लोगों को जमकर पसंद भी आने लगा है. करीब तीन महीने तक चलने वाले इस शो का हर सीजन दर्शकों को खूब ड्रामा, लड़ाई-झगड़े और इमोशन से भरपूर मजा देता है. शो के आखिर में ग्रैंड फिनाले होता है और एक कंटेस्टेंट इसका विनर बनता है. बिग बॉस की पॉपुलैरिटी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसके एपिसोड्स सिर्फ टीवी पर ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर भी जमकर ट्रेंड करते हैं. क्या आप जानते हैं कि आखिरकार इसका मालिक कौन है और वह एक सीजन से कितना कमाता है? चलिए जानें.
कौन है शो का मालिक?
लोगों को लगता है कि बिग बॉस सलमान खान का शो है, क्योंकि पिछले एक दशक से ज्यादा समय से सलमान ही इस शो का चेहरा बने हुए हैं. लेकिन सच्चाई थोड़ी अलग है. बिग बॉस के असली मालिक भारत से नहीं, बल्कि विदेश से हैं. यह शो नीदरलैंड्स के एक मीडिया ग्रुप एंडोमल शाइन Endemol Shine का है. एंडोमल शाइन ने अलग-अलग देशों में अपने फॉर्मेट पर शो बनाए हैं. उन्होंने इन शो को अलग-अलग भाषाओं और नामों से लॉन्च किया है.
एक सीजन से कितनी होती है कमाई?
एक सीजन से कमाई का ठीक-ठीक अंदाजा तो नहीं है, लेकिन इतना तय है कि शो से हर साल मालिक को करोड़ों रुपये का मुनाफा होता है. इस शो को भारी संख्या में दर्शक देखते हैं, जिसके लिए एड एजेंसियां विज्ञापन स्लॉट खरीदने के लिए भारी मात्रा में रुपये खर्चा करती हैं. यह शो के लिए कमाई का एक बड़ा हिस्सा होता है. इसके अलावा शो को प्रसारित करने के राइट्स अलग-अलग देशों में भी बेचे जाते हैं, उससे भी मुनाफा होता है. साथ ही साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी प्रसारित करने के लिए इसके राइट्स बेचे जाते हैं.
भागलपुर में दो पाकिस्तानी महिला के रहने से मचा हड़कंप
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले चल रहे वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) विवाद के बीच बड़ा वाला खुलासा हुआ है. केंद्रीय गृह मंत्रालय की जांच में सामने आया है कि टैंक लेन में इमराना खानम उर्फ इमराना खातून, पिता इबतुल हसन और फिरदौसिया खानम पति मो. तफजील अहमद ने गैर कानूनी तरीके से मतदाता पहचान पत्र बनवा लिए हैं. इस सूचना के बाद से भागलपुर पुलिस महकमे सकते में है. जिले में अवैध रूप से वीजा अवधि को ओवरस्टे कर रह रहे विदेशियों का पता लगाने का काम शुरू कर दिया है. जांच के दौरान भागलपुर में तीन पाकिस्तानी नागरिकों के रहने की पुष्टि हुई है.
पुलिस के मुताबिक तीन में दो महिलाएं इशाकचक थाना क्षेत्र के भीखनपुर गुमटी नंबर 3 टैंक लेन में रह रही हैं. मंत्रालय की रिपोर्ट पर जब पुलिस मुख्यालय ने एसएसपी से जांच कराई तो हैरान करने वाले खुलासे हुए. इस खुलासे के बाद से स्थानीय लोगों में खौफ का माहौल है. लोगों का कहना है कि अब वे भी अपने घरों में सुरक्षित नहीं हैं. खास बात यह है कि इन दो महिलाओं के नाम पर मतदाता पहचान पत्र भी बन गए हैं.
फिलहाल, स्पेशल ब्रांच की रिपोर्ट पर पुलिस मुख्यालय में सनसनी फैल गई है. स्पेशल ब्रांच के एसपी ने अब विस्तृत जानकारी देकर भागलपुर के डीएम और एसएसपी से जांच और सत्यापन कर आवश्यक कार्रवाई समेत विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. भागलपुर के डीएम डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बताया कि दोनों पाकिस्तानी महिलाओं का नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है.
1956 में वीजा पर आई थीं भारत
गृह मंत्रालय की जांच में सामने आया कि टैंक लेन में इमराना खानम उर्फ इमराना खातून, पिता इबतुल हसन और फिरदौसिया खानम पति मो. तफजील अहमद के नाम से मतदाता पहचान पत्र बनाया गया है. प्रशासन के पास दोनों का इपिक नंबर है. रिपोर्ट में पाया गया कि रंगपुर निवासी फिरदौसिया 19 जनवरी 1956 को 3 महीने के वीजा पर भारत आई थीं. वहीं इमराना 3 साल के वीजा पर आई थी. इसके अलावा, पाक नागरिक मोहम्मद असलम 24 मई 2002 को दो साल के लिए भारत आया था. असलम ने भी अपना आधार कार्ड बनवा लिया है.
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह
भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने बुधवार (01 अक्टूबर) को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आईएएफ की असली ताकत केवल पायलटों और गरुड़ कमांडो तक सीमित नहीं है. उन्होंने कहा कि IAF का हर सदस्य-तकनीशियन, इंजीनियर, लॉजिस्टिक्स और ग्राउंड स्टाफ-उसकी रीढ़ है.
एयर चीफ मार्शल ने कहा कि भारतीय वायुसेना की शक्ति केवल लड़ाकू विमानों और कमांडो पर आधारित नहीं है, बल्कि पूरी टीम की अनुशासन, तकनीकी दक्षता और समर्पण से बनती है. उनका संदेश था कि हर एयरमैन और अफसर की भूमिका मिशन की सफलता में उतनी ही महत्वपूर्ण है.
पायलट और कमांडो नहीं, पूरी टीम है असली ताकत
एयर चीफ मार्शल ने कहा कि वायुसेना की ताकत केवल आसमान में उड़ने वाले पायलट और विशेष ऑपरेशन करने वाले गरुड़ कमांडो ही नहीं हैं, बल्कि हर रैंक का जवान इसमें बराबर का योगदान देता है.
तकनीशियन और इंजीनियरों की अहम भूमिका
उन्होंने बताया कि वायुसेना के विमानों को युद्ध या मिशन के लिए तैयार करने में तकनीशियन और इंजीनियरों की अहम भूमिका होती है. उनकी मेहनत और कुशलता के बिना पायलट हवा में उड़ान नहीं भर सकते.
लॉजिस्टिक्स और ग्राउंड स्टाफ की जिम्मेदारी
IAF के लॉजिस्टिक्स और ग्राउंड स्टाफ हर मिशन के पीछे चुपचाप काम करते हैं. हथियारों की सप्लाई, ईंधन, और रणनीतिक सपोर्ट इन्हीं की जिम्मेदारी होती है.
अनुशासन और टीमवर्क ही सफलता की कुंजी
एयर चीफ मार्शल ने कहा कि भारतीय वायुसेना का हर सदस्य चाहे वह अधिकारी हो या एयरमैन, वह अपनी जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाता है. यही टीमवर्क IAF की असली ताकत है.
सदाकत आश्रम पटना
पटना का सदाकत आश्रम महज एक इमारत नहीं, बल्कि भारत की आज़ादी और राजनीति का जीता-जागता गवाह है। गांधी के कदमों से लेकर जेपी के आंदोलन की ललकार तक, इस जगह ने कई ऐतिहासिक पल देखे। कांग्रेस, जिसने आज़ादी के बाद इसे लगभग भुला दिया था, अब 85 साल बाद इसकी ओर लौट रही है। सवाल यह उठता है कि कांग्रेस को अचानक इस आश्रम की याद क्यों आई और यहां का इतिहास आखिर कहता क्या है?
सदाकत आश्रम का इतिहास
बहुत कम लोग जानते हैं कि बिहार कांग्रेस की स्थापना 1921 में हुई थी. यानी कांग्रेस की स्थापना 36 साल बाद. बिहार प्रांतीय कांग्रेस कमेटी के दफ्तर के रूप में इसकी शुरुआत हुई, जिसे बाद में सदाकत आश्रम के रूप में इसकी पहचान बनी. आज भी बिहार कांग्रेस के मुख्यालय को लोग इसी नाम से जानते हैं. यह पटना के गंगा किनारे पर स्थित है.
स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा है नाम
महात्मा गांधी ने बिहार प्रवास के दौरान कई बार यहां डेरा डाला. आजाद भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने भी लंबे समय तक यहीं रहकर काम किया. यह आश्रम स्वतंत्रता संग्राम और किसानों के आंदोलनों की रणनीति बनाने का प्रमुख ठिकाना रहा.
राजेंद्र प्रसाद ने यही ली थी अंतिम सांस
देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद पद छोड़ने के बाद यही आकर रहे थे. उन्होंने यहीं अपने अंतिम दिन बिताए. आजादी के बाद कांग्रेस धीरे-धीरे इस आश्रम से दूर होती चली गई.कांग्रेस की बैठकों और आंदोलनों का यह केंद्र उपेक्षा का शिकार होता गया. बिहार के नेताओं और लोगों की सदाकत आश्रम में रही, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में इसकी अहमियत घट गई.
बिहार चुनाव और महागठबंधन की मजबूती के लिए कांग्रेस ने फिर से इस ऐतिहासिक स्थल का सहारा लिया. गांधी और डॉ. राजेंद्र प्रसाद की विरासत के जरिए जनता से जुड़ाव दिखाने की कोशिश की. कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं को यह संदेश देना चाहती है कि वह अब भी गांधी की राह पर चलने का दावा करती है.
बिहार चुनाव पर क्या होगा असर?
CWC की बैठक किसी राज्य में होना अपने-आप में एक राजनीतिक संदेश है. बिहार में बैठक का मतलब है कि कांग्रेस यहां गंभीरता से चुनावी तैयारी कर रही है और अपने संगठन को एक्टिव मोड में लाना चाहती है. इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और पार्टी की मौजूदगी का एहसास होगा. महागठबंधन में कांग्रेस की भूमिका पर कई बार सवाल उठते हैं. ऐसे में बैठक यह संकेत देती है कि कांग्रेस सीट बंटवारे और रणनीति में अपनी अहमियत दिखाना चाहती है. इससे आरजेडी जैसे सहयोगियों पर दबाव बढ़ सकता है. बेरोजगारी, महंगाई, सामाजिक न्याय और केंद्र की नीतियों पर चर्चा कर नैरेटिव बनाने की कोशिश होगी. यही आगे चलकर प्रचार की दिशा तय करेगा.